Feb 2, 2020
गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ज़िंदगी से क्या शिकायत दोस्तो

ज़िंदगी से क्या शिकायत दोस्तो
है खुदा की ये इनायत दोस्तो

हो रही है गुदगुदी ये सोचकर
कर न बैठें हम मुहब्बत दोस्तो

जुल्फ़ उड़ती ये हवा में देखिए
कर रही हैं क्या कयामत दोस्तो

पास रहकर भी हुए हम अजनबी
दरमियां कैसी मसाफ़त दोस्तो

आजकल माहौल कैसा हो गया
चल रही कैसी सियासत दोस्तो
—-सागर

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