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*ज़िंदगी ने अब किया*

Dharmender Arora Musafir

Dharmender Arora Musafir

गज़ल/गीतिका

September 21, 2016

2122 2122 2122 212
फाइलातुन फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन

ज़िंदगी ने अब किया दिल को हमारे शाद है
फूल जैसी हर डगर से हो रहे आबाद है
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प्रीत के ही सुर सजे हैं जग गये सपने सभी
उलझनें सारी मिटी ग़म भी हुआ नाशाद है
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चाँदनी भी चाँद से अब तो फ़कत शरमा रही
उन सितारों में बसी सी इक सुहानी याद है
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जग उजाला सा करें रोशन हुए वो दीप भी
साज है अंतर सजे अब बज रहा सा नाद है
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हौंसले की जीत होती बात ये सबने कही
मंजिलें हैं वो मिली जिनसे बशर आबाद है
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Author
Dharmender Arora Musafir
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान *
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