Skip to content

ज़िंदगी खत्म

Yash Tanha Shayar Hu

Yash Tanha Shayar Hu

कविता

April 10, 2017

ख़ुदा तेरी कितनी मेहरबानी हम पर,
की शाम को हम बेहोश हो जाते है ,
ज़िंदगी तेरा सारा दिन हम बोझ सहकर ,
शाम को हम तो मदहोश हो जाते है,

सलीखा कोई सीखा दे ज़िंदगी जीने का हमें,
की शाम को हम तो खामोश हो जाते है,
सरहदों पर दम तोड़ देती है ख्वाइशें,
मजबूर तनहा जय हो का नारा लगाते है,

किन परछाइयों की बात करते हो तुम तनहा,
जो सुबह की भीड़ में अपना चेहरा छुपाते है,
घोंसलों के तिनके इकट्ठे करने में ज़िंदगी खत्म,
और घोंसले को बनाने में कितने तिनके टूट जाते है,

Share this:
Author
Yash Tanha Shayar Hu
Yash Pal Sejwal born 10th March 1980 is a Poet,Lyrics,Songs writer from Delhi, I create and started writing on Facebook page "Tanha Shayar Hu" IN JANUARY 2016. This is my collection of Poems, Lyricis, and Shayari : Facebook page :... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you