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ज़ालिम हसीना..

यूँ अदाएँ ना बिखेर ये ज़ालिम हसीना…
इस दिल में तेरा आशियाँ बन रहा है….
देखना यूँ साथ चलते चलते हम….
कहीं हमसफ़र ना बन जाएँ…..

© बेनाम-लफ्ज़…

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jitendra pandre
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