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ग़ज़ल

तेजवीर सिंह

तेजवीर सिंह "तेज"

कविता

April 7, 2017

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दुश्मनी भी न हम से निभाई गई।
ये नज़र जब नज़र से मिलाई गई।

चाक हैं दिल-जिगर नैन में नीर है।
दिल्लगी ना किसी से बताई गई।

मैं सलाई चला बुन चुकी ख़्वाब जो।
आँख खुलते कहाँ ये बुनाई गई।

चोट दे-दे के सब बन रहे रहनुमां।
ए ख़ुदा तेरी कितको खुदाई गई।

रूह तक ज़ख्म का सिलसिला देखिए।
पर दवा भी न कोई लगाई गई।

प्यास से जान मेरी चली जा रही।
अंजुरी भर न उनसे पिलाई गई।

‘तेज’ सुर में कोई तो ग़ज़ल अब कहो।
जो न महफ़िल में अब तक सुनाई गई।

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© तेजवीर सिंह ‘तेज’

Author
तेजवीर सिंह
नाम - तेजवीर सिंह उपनाम - 'तेज' पिता - श्री सुखपाल सिंह माता - श्रीमती शारदा देवी शिक्षा - एम.ए.(द्वय) बी.एड. रूचि - पठन-पाठन एवम् लेखन निवास - 'जाट हाउस' कुसुम सरोवर पो. राधाकुण्ड जिला-मथुरा(उ.प्र.) सम्प्राप्ति - ब्रजभाषा साहित्य लेखन,पत्र-पत्रिकाओं... Read more
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