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ग़ज़ल

Pankaj Trivedi

Pankaj Trivedi

गज़ल/गीतिका

January 20, 2017

कोई अपनों के रिश्तो में गैर होते हैं
कोई गैर होकर भी जो अपने होते है

रिश्तों के नाम से रिश्ता नहीं होता
कोई रिश्तों के बगैर ही साथ होते हैं

गज़ब है इन्सान के नाम ये जीवन
कभी जीवन में कोई बेजान होते हैं

पौधों से रिश्तों का बना यह पेड़ देखो
जड़ों में प्यार से रिश्ते सफल होते है

*
|| पंकज त्रिवेदी ||

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Author
Pankaj Trivedi
संपादक : विश्वगाथा (हिन्दी साहित्य की अंतर्राष्ट्रीय त्रैमासिक मुद्रित पत्रिका) / लेखन- कविता, कहानी, लघुकथा, निबंध, रेखाचित्र, उपन्यास ।

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