ग़ज़ल (26 जनवरी)

ग़ज़ल (जनवरी के मास की)

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जनवरी के मास की छब्बीस तारिख आज है,
आज दिन भारत बना गणतन्त्र सबको नाज़ है।

ईशवीं उन्नीस सौ पंचास की थी शुभ घड़ी,
तब से गूँजी देश में गणतन्त्र की आवाज़ है।

आज के दिन देश का लागू हुआ था संविधान,
है टिका जनतन्त्र इस पे ये हमारी लाज है।

हक़ सभी को प्राप्त हैं संपत्ति रखने के यहाँ,
सब रहें आज़ाद हो ये एकता का राज़ है।

राजपथ पर आज के दिन फ़ौज़ की छोटी झलक,
दुश्मनों की छातियाँ दहलाए ऐसी गाज़ है।

संविधान_इस देश की अस्मत, सुरक्षा का कवच,
सब सुरक्षित देश में सर पे ये जब तक ताज है।

मान दें सम्मान दें गणतन्त्र को नित कर ‘नमन’,
ये रहे हरदम सुरक्षित ये सभी का काज है।

बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया

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