गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

$ग़ज़ल

#ग़ज़ल
पीर का सागर हमारा दिल हुआ
क़ैद में जो हर मिला साहिल हुआ/१

तेज़ इतनी हो गई हैं आँधियाँ
झोंपड़ों का हर लम्हा क़ातिल हुआ/२

प्यार की बातें कहीं खो गई हैं
शह्र में दिल अब कहीं शामिल हुआ/३

घर बचेगा या छिनेगी ये ज़मीं
रोग से पीड़ित कहीं दाख़िल हुआ/४

चोट अपनों ने तुम्हें दी है यहाँ
दिल तभी तो आपका ग़ाफिल हुआ/५

ठोकरों से जीत आई ज़िंदगी
शौक़ काहिल हर हसीं मंज़िल हुआ/६

यार ‘प्रीतम’ छल नहीं कर दोस्ती
सब कहें बंदा बड़ा मानिल हुआ/७

#आर.एस. ‘प्रीतम’
सर्वाधिकार सुरक्षित ग़ज़ल

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🌺🥀जीवन-परिचय 🌺🥀 लेखक का नाम - आर.एस.'प्रीतम' जन्म - 15 ज़नवरी,1980 जन्म स्थान - गाँव जमालपुर, तहसील बवानीखेड़ा,ज़िला-भिवानी,राज्य- हरियाणा। पिता का नाम - श्री रामकुमार माता का नाम - श्री…
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