ग़ज़ल

अभी हाथ में असर नहीं है ।
अभी पाँव में सफ़र नहीं है ।।

कितना अमन चैन है बरपा ?
मग़र कोई भी निडर नहीं है ।।

अँधियारा है चकाचौंध का,
अभी शहर में सहर नहीं है ।।

गाँव अभी भी प्यासे-प्यासे ,
नदिया है पर नहर नहीं है ।।

आँखें हैं घर से बाहर तक,
लेकिन उनमें नज़र नहीं है ।।

जितनी लंबी – लंबी नाकें
उतने चौड़े जिगर नहीं है ।।

—– ईश्वर दयाल गोस्वामी ।

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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02...
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