23.7k Members 50k Posts

ग़ज़ल

हर इक़ ग़लत बात पे कितनों से लड़ गया
वो दूसरों को सुधारते सुधारते ख़ुद बिगड़ गया

इक़ दरख़्त ने कई पौधों को बचाये रक्खा
पाल पोसकर बड़ा किया औऱ ख़ुद उजड़ गया

सच कह देने वालों को ही जाने क्यूं सज़ा है
झूंठे सलामत रहे,जो सच बोला माटी में गड़ गया

हर कोई फ़कत अपनी ही रज़ा चाहता है
दूसरों को हंसते देखा तो अन्दर तलक सड़ गया

~अजय “अग्यार

4 Views
अजय अग्यार
अजय अग्यार
159 Posts · 1.5k Views
Writer & Lyricist जन्म: 04/07/1993 जन्म स्थान नजीबाबाद(उत्तर प्रदेश) शिक्षा : एम.ए अंग्रेज़ी साहित्य मोबाइल:...
You may also like: