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ग़ज़ल

Ramkishore Upadhyay

Ramkishore Upadhyay

गज़ल/गीतिका

July 8, 2016

सपना भी रुचिकर हो जाता,
गर उसका दिल घर हो जाता \1\
*
सबके दुख जो खुद सहले वो,
दुनियां में ईश्वर हो जाता\2\
*
झूठी बात लगे सब अच्छी ,
सच बोले नश्तर हो जाता\3 \
*
गर वो छू लेता पांवो को ,
ऊँचा उसका सर हो जाता \4\
*
यदि वो हंस पड़ती होले से,
मेरा भी कम डर हो जाता \5\
*
नीचा कर लेता वो सर को,
या फिर ऊँचा दर हो जाता \6\
*
जो पूजे नित मात पिता को ,
मन उसका मन्दिर हो जाता \7\
**
रामकिशोर उपाध्याय

Author
Ramkishore Upadhyay
मैं हिंदी में कविता ,ग़ज़ल ,मुक्तक ,कहानी और व्यंग्य लिखता हूँ |
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