गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ग़ज़ल — ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा बस एक पल में आ गया

2122 2122 2122 212

ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा बस एक पल में आ गया,
नाम तेरा इक महक बन साँस में जब छा गया

उम्र भर भटका किये, इक पल सुकूँ की चाह में,
वो मिले तो रूह बोली, तू सफ़ीना पा गया।

बस जुनूँ था आसमां में घर नया अपना बने
इस जुनूँ की चाह में सब घर ज़मीं का ढा गया

था किया वादा लड़ूँगा भूख से जो फ़र्ज है
भूख मेरी ही बड़ी थी सब अकेला खा गया

अब मसीहा सर झुका कर खूब सेवा में लगे
लग रहा है दिन चुनावों का सुहाना आ गया

— क़मर जौनपुरी

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