गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ग़ज़ल लिख दू

कभी बेखुदी में कभी संभल संभल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

कुछ लिखू पहले सी कुछ बदल बदल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

तेरे होठो को कभी गुलाब कभी कमल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

कभी तेरे आगोश में कभी आगोश से निकल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू

कभी लिखू संभल के कभी फिसल फिसल लिख दू
आ अपने होठों से तेरे होठों पे इक ग़ज़ल लिख दू
—ध्यानू

4 Likes · 2 Comments · 32 Views
Like
You may also like:
Loading...