.
Skip to content

ग़ज़ल- रोती कहानी हर तरफ है

आकाश महेशपुरी

आकाश महेशपुरी

गज़ल/गीतिका

September 17, 2016

ग़ज़ल- रोती कहानी हर तरफ है
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
यहाँ रोती कहानी हर तरफ है
बड़ी लगती वीरानी हर तरफ है

नया इक आशियाना ढूँढ लेना
लगे दरिया तुफानी हर तरफ है

नज़ारे देख कर लगता कि जैसे
खुदा की राजधानी हर तरफ है

नदी यह तो बहुत उफनी हुई है
यहाँ कश्ती पुरानी हर तरफ है

कहीँ रोजी हमेँ मिलती नहीँ है
बहुत पिसती जवानी हर तरफ है

यहाँ अब भूख का मंजर दिखेगा
बड़ी बेबस किसानी हर तरफ है

नहीँ बैठो ग़मो का बोझ ले के
जरा देखो रवानी हर तरफ है

यही “आकाश” का पैगाम ले लो
हँसो तो जिन्दगानी हर तरफ है

– आकाश महेशपुरी

Author
आकाश महेशपुरी
पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन पता- ग्राम- महेशपुर, पोस्ट- कुबेरस्थान, जनपद- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
Recommended Posts
रगं तआस्सुब के जो देगी राजधानी हर तरफ़
खूब है मशहूर ये झूठी कहानी हर तरफ़ चाँद पर देखी गई है एक नानी हर तरफ ....... सारी दुनिया जानती है क़ीमतें इनकी मगर... Read more
ग़ज़ल :-- सारे शहर में जुल्म है आक्रोश है !!
गज़ल --: सारे शहर में जुल्म है आक्रोश है !! ग़ज़लकार --: अनुज तिवारी "इंदवार" ☀☀ग़ज़ल☀☀ हर शहर में ज़ुल्म है आक्रोश है मेरे दिल... Read more
ग़ज़ल (इस शहर  में )
ग़ज़ल (इस शहर में ) इन्सानियत दम तोड़ती है हर गली हर चौराहें पर ईट गारे के सिबा इस शहर में रक्खा क्या है इक... Read more
मुक्तक
हर तरफ लगी होड़ ,ये दौड़ कैसी है मानवी आधार भी ताख पर रखी जैसी है जीवन के सुखद पहलू भी नजर अंदाज कर हर... Read more