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ग़ज़ल- मुँह छिपाये जा रहा था वो मुझे पहचान कर

आकाश महेशपुरी

आकाश महेशपुरी

गज़ल/गीतिका

September 17, 2016

ग़ज़ल- मुँह छिपाये जा रहा था वो मुझे पहचान कर
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है ग़रीबी साथ पर ये दुख हुआ है जानकर
मुँह छिपाये जा रहा था वो मुझे पहचान कर

नाव थी मजधार मेरी वो किनारा कर गया
जी रहा था मैँ जिसे पतवार अपनी मानकर

बात आई थी हवा से पाप धुलता है कहीँ
मैल है दिल मेँ अगर तो क्या करेँगे स्नान कर

ये धरा भी एक दिन मिट कर रहेगी तय सुनेँ
है ज़मीँ ये कह रही मत बैठना अभिमान कर

कह रहा “आकाश” मुझको वो कबूतर आजकल
देखता जैसे शिकारी तीर कोई तान कर

– आकाश महेशपुरी

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Author
आकाश महेशपुरी
पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन पता- ग्राम- महेशपुर, पोस्ट- कुबेरस्थान, जनपद- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
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