ग़ज़ल- मिलने की ललक दिल मे, कसक बनके रहेगी...

मिलने की ललक दिल मे, कसक बनके रहेगी।
दिलवर की कही बात, सबक बनके रहेगी।।

हाँथो की लकीरों में, नहीं नाम तुम्हारा।
तेरी कमी तो दिल मे कसक बनके रहेगी।।

छोटी सी मुलाकात, ने किस्मत ही बदल दी।
आँखों मे तुम्हारी ही, झलक बनके रहेगी।।

इक़ गीत सुना था जो कभी मुँह से तुम्हारे।
इक रोज़ ये आवाज, खनक बनके रहेगी।।

अब मिल गयी है ‘कल्प’ मुहब्ब्त की निशानी।
माथे पे तुम्हारे ये, तिलक बनके रहेगी।।

अरविंद राजपूत ‘कल्प’
221 1221 1221 122

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