ग़ज़ल- थाम कर हाथ राहें दिखाना सनम।

थाम कर हाथ राहें दिखाना सनम।
साथ जीवन मरण का निभाना सनम।।

तुम मिले प्राणवायु मिली है मुझे।
मर न जाऊँ कहीं मैं बचाना सनम।।

छोड़कर सारी दुनिया को मैं आगया।
हर बला से मुझे अब बचाना सनम।।

भूल जब मैं करूँ डांटना मारना।
रूठ कर दूर मुझसे न जाना सनम।।

मैं अनाड़ी निकम्मा व नादान हूँ।
हाथ मेरा पकड़ तुम सिखाना सनम।।

अरविंद राजपूत ‘कल्प’
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