Skip to content

ग़ज़ल- चोट देने मुझे रुलाने आ

आकाश महेशपुरी

आकाश महेशपुरी

गज़ल/गीतिका

September 18, 2016

ग़ज़ल- चोट देने मुझे रुलाने आ
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
चोट देने मुझे रुलाने आ
फिर से जलवा वही दिखाने आ

अब तो खुशियाँ हमें डरातीं हैं
ग़म की दुनियाँ जरा बसाने आ

मेरे आँसू उदास रहते हैं
इनको फिर से गले लगाने आ

अब ये आहें भी आह भरतीं हैं
झूठे वादे लिये पुराने आ

कौन जाने “आकाश” क्या होगा
वक्त को भी तूँ आजमाने आ

– आकाश महेशपुरी

Share this:
Author
आकाश महेशपुरी
पूरा नाम- वकील कुशवाहा "आकाश महेशपुरी" जन्म- 20-04-1980 पेशा- शिक्षक रुचि- काव्य लेखन पता- ग्राम- महेशपुर, पोस्ट- कुबेरस्थान, जनपद- कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you