ग़ज़ल- गुंडों में ऐसा क्या पाया लोगों ने?

ग़ज़ल- गुंडों में ऐसा क्या पाया लोगों ने?
□□□□□□□□□□□□□□
गुंडों में ऐसा क्या पाया लोगों ने?
संसद तक देखो पहुँचाया लोगों ने।

इतनी हिम्मत! मार रहे अब वोटर को!
बकरी को भी बाघ बनाया लोगों ने।

वे अस्मत तक लूट रहे हैं बहनों की,
पुष्पहार जिनको पहनाया लोगों ने।

सेवक देखो राजा बनकर बैठा है,
इतना सिर पर है बैठाया लोगों ने।

ज़ुल्म हजारों सहते लेकिन ज़ुल्मी को,
सबक नहीं “आकाश” सिखाया लोगों ने।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 30/07/2019

2 Likes · 162 Views
संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मूल नाम- वकील कुशवाहा माता- श्री मती...
You may also like: