ग़ज़ल- इश्क़ में क्यों उसे...

ग़ज़ल- इश्क़ में क्यों उसे…
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इश्क़ में क्यों उसे ग़मज़दा कर दिया
सोचता हूँ कि मैंने ये क्या कर दिया

बातें करता रहा वो मुहब्बत भरी
और मैंने उसे अनसुना कर दिया

इश्क़ की दास्ताँ छेड़कर आपने
दर्द को बेवजह दो गुना कर दिया

ज़िस्म दो हैं भले जान तो एक है
क्यूँ ज़माने ने हमको जुदा कर दिया

वो गया फूल देकर मुझे ख़्वाब में
हक़ मुहब्बत का उसने अदा कर दिया

याद “आकाश” आने लगा वो बहुत
जिसको मिलने से मैंने मना कर दिया

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 04/05/2020

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