ग़ज़ल- आज ये क्या किया सनम तुमने

ग़ज़ल- आज ये क्या किया सनम तुमने
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आज ये क्या किया सनम तुमने
जो न सोचा दिया वो गम तुमने

तेरे प्याले में था सुधा रस भी
विष क्यूँ होने दिया हजम तुमने

दूर जिसने रखा बलाओं को
सोचो उसपे किया सितम तुमने

कैसे लोगों से मैं मिलाऊँगा
नैन मेरे किए जो नम तुमने

बोझ तानों का कौन ढोयेगा
मुझमें छोड़ा कहाँ है दम तुमने

क्यूँ भला जिन्दगी से डरते हो
जब यहीं पर लिया जनम तुमने

चोट “आकाश” रोज खाते हैं
और हँसने की दी कसम तुमने

– आकाश महेशपुरी

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