ग़ज़ल- क़ाबिल तेरे नहीं हूँ मुझे ध्यान आ गया

ग़ज़ल- क़ाबिल तेरे नहीं हूं मुझे ध्यान आ गया
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मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन
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अच्छा हुआ कि यार अभी ज्ञान आ गया
क़ाबिल तेरे नहीं हूँ मुझे ध्यान आ गया
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मेरे बहुत हैं चाहने वाले जहान में
क्यूँ दिल दुखाने को कोई अनजान आ गया
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वो तो बड़ा बेदर्द है, ज़ालिम है दोस्तों
मैंने जिसे माना कि है भगवान आ गया
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जाकर कभी वो देख ले शमशान की तरफ
है हुश्न पे यहाँ जिसे अभिमान आ गया
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मुझसे खफ़ा ‘आकाश’ भला क्यों हुआ है वो
क्या उसके जाल में नया इंसान आ गया

– आकाश महेशपुरी

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