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* ग़ज़ल :- *** फ़जल ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गज़ल/गीतिका

January 29, 2017

फ़जल उनकी क्या असर कर गयी
मेरी ग़ज़ल जो ग़ज़ल बन गयी
सफ़ीना प्यार का उतारा किनारे
फिर मांझी न जाने कहां खो गयी
चाहा था बहुत चाहने वालों ने उनको
हमारी अदा क्या असर कर गयी
न सोचा था हमनें ऐसा भी होगा
जिंदगी कैसे सफ़र बन गयी
न जाने सफ़र में हमसफ़र बनकर
साथ हमारे वो कब हो गयी
आँखे हैं उनकी पयमाने माय के
उनकी नज़र कब असर कर गयी
यूं तो कभी हम पीते नहीं हैं मगर वो
ज़ाम-ए-नज़र से पिलाये तो क्या करें
ऐ वक्त ज़रा जीने दे मुझको
पयमाने मय के पीने दे मुझको
फजल उनकी क्या असर कर गयी
मेरी ग़ज़ल जो ग़ज़ल बन गयी ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more
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