ग़ज़ल।मेरे एहसास की दुनिया बसाओ तो तुम्हे जाने।

ग़ज़ल।मेरे एहसास की दुनिया।

चलो रश्मे मुहब्बत को निभाओ तो तुम्हे जाने ।
मेरे एहसास की दुनिया बसाओ तो तुम्हें जाने ।।

वही ज़ुल्फ़ों की शाया है वही है झील सी आँखे ।
बेकाबू दिल की आहट को सुनाओ तो तुम्हे जाने ।।

पढ़ो तुम आज पैमाइस निग़ाहों की बेचैनी को ।
रहे न फ़ासला हरगिज़ मिटाओ तो तुम्हे जाने ।।

प्यासा हूँ सितम ढाती तेरी ख़ामोश मदहोशी ।
लगी है आग़ जो दिल में बुझाओ तो तुम्हे जाने ।।

तड़पती रूह तन्हाई सम्हाली अब नही जाती ।
ज़रा आग़ोश में आकर समाओ तो तुम्हे जाने ।।

तेरे इन शुर्ख़ होठों पर लवों की बूंद सी आकर ।
सजी जामे मुहब्बत को पिलाओ तो तुम्हे जाने ।।

दवा ऐ इश्क़ तो’रकमिश’ज़बाने में नही मिलती ।
वफ़ा ऐ इश्क़ में खुद को लुटाओ तो तुम्हे जाने ।।

राम केश मिश्र’रकमिश’

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रकमिश सुल्तानपुरी (राम केश मिश्र) मैं भदैयां ,सुल्तानपुर ,उत्तर प्रदेश से हूँ । मैं ग़ज़ल...
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