गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ग़र तू कहे तो हम सुधर जाये

अपनी वादों से हम मुकर जाये !
ग़र तू कहे तो हम सुधर जाये !!

रोज़ मर मर के जी रहा हूँ मै ,
क्यो कहती नहीं, हम मर जाये ?

तनहा रहने की अब तो आदत है ,
तेरी खुशियों से माँग भर जाये !

तेरी चाहत में जां लुटा दू मै ,
भले झूठा ही प्यार कर जाये !

छोड़ दूँगा तेरी गलियों में आना जाना ,
अब न होगा कोई जो देख् मुझे डर जाये !

प्यार पाते है खुशनशीब यहा ,
तेरी यादो में हम गुजर जाये !

क्यो होता है तू उदास जुगनू ?
तू चमके तो रजनी भी निखर जाये !!

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