गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ग़म की बारिश में गाये दिवाना

दो घड़ी का है मौसम सुहाना
ग़म की बारिश में गाये दिवाना

है हंसी इश्क़ की तो घड़ी भर
उम्रभर को है ज़ालिम ज़माना

तान के सीना मैं भी खड़ा हूँ
आज क़ातिल का देखूँ निशाना

है खुला आसमां सर के ऊपर
मुफ़लिसों का कहाँ है ठिकाना

ये जहां सब जहाँ मेहमाँ हैं
जाने कब कौन होवे रवाना

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