Sep 7, 2016 · मुक्तक
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ग़मो ख़ुशी

रहती नहीं मिठास,ज़ुबाँ पर देर तक,
रहती मुई खटास,ज़ुबाँ पर देर तक,
ग़मोख़ुशी का मेल,जो काश हो जाता,
रहती ग़मोख़ुशियाँ,ज़ुबाँ पर देर तक ।

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avadhoot rathore
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