मुक्तक · Reading time: 1 minute

!!** ग़मों से चूर **!!

ग़मों से चूर
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1222/1222/1222/1222

नहीं दीदार है फिर भी मुझे वो याद आती है,
न जाने कौन सी है बात जो मुझको सताती है,
बदलती करवटों से पूछ लेता हूँ बता दो तुम,
गमों से चूर, रातों में नहीं जब नींद आती है।

दीपक “दीप” श्रीवास्तव

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