ख़ुशियों की एक मंडी

ख़ुशियों की एक मंडी
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दुलहंडी शुभ पर्व पर,ठाने सब ये बात।
मन-अँधेरा दूर कर,देखें नवल प्रभात।।
देखें नवल प्रभात,खेलें जीत की होली।
रंग प्रीत का डाल,बोलें मीत की बोली।
सुन प्रीतम की बात,ख़ुशियों की एक मंडी।
रंग-रंग की लाख,कहते सभी दुलहंडी।

राधेयश्याम बंगालिया “प्रीतम”
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