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ख़ुदा भी आसमां से ………..

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

September 25, 2017

किस्मत भी कितनी अजीब है

कोई घरवाली पाकर रो रहा है

तो कोई घरवाली खोकर रो रहा है

कोई घर लाकर रो रहा है

तो कोई घर लाने के लिए रो रहा है

कोई
मजबूरी में इस बोझ को ढो रहा है

और
इस चक्कर में अपना आपा खो रहा है

क्या चक्कर है बीबी का

भगवान भी जिसे बना कर सो रहा है

आदमी जिसे

देख देख कर बेतहासा रो रहा है

उसे समझ नही आ रहा

ये क्या हो रहा है

ख़ुदा भी आसमां से

जब जमीं पर देखता होगा

इस बीबी रूपी प्राणी को बनाकर

सोचता होगा ।।

?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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