गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ख़ामोशी

मेरे तस्वीर के टुकड़ो को सजाया किसने
मुझे इश्क़ का कदरदान बनाया किसने

शराब में डूबा हुआ प्याला हूँ मै
शबनमी एहसासो से जगाया किसने

न दूर है कोई न पास में मेरे
दिल के चिराग को आखिर जलाया किसने

वफ़ा है कोई चीज़ इस जहाँ में, मै नहीं मानता
बेवफाई का ए तरन्नुम सिखाया किसने

शराब में मदहोश बहुत अच्छा हूँ मै
नशे में चूर मुझे रहना सिखाया किसने
मेरे तस्वीर के————–

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