शेर · Reading time: 1 minute

ख़ाक…

हो जाऊँगा ‘ख़ाक’ इक दिन देखना तुम,
फिर उठा ख़ाक मिरी, मुझे समेटना तुम ।।

#हनीफ़_शिकोहाबादी ✍️

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