कविता · Reading time: 1 minute

*हौंसलों की उड़ान*

“जो पक्षी गिरने की हिम्मत करता है”
“वही पक्षी उड़ना सीखता है”

उड़ने की चाहत हो तो गिरने का डर छोड़ना होगा !
किसी ओर से नहीं अपने ही मन से लड़ना होगा !!
डराएगी ये दुनिया तुमको बहुत से उदाहरणों से !
मगर तुमको अपना हौंसला खुद ही बनना होगा !!

जब भी गिरो एक नई उम्मीद से भर जाना !
बार बार गिरकर भी तुम हर बार सम्भल जाना !!
अपने मन से बढ़कर कोई साथ नही देता !
एक पल के लिए भी तुम ना घबराना !!

जब भी लगे हिम्मत तुम्हारी टूट रही है !
सोच लेना की मंजिल तुम्हें ढूंढ रही है !!
अपने मन में एक नया साहस भर लेना !
वो पल दूर नहीं जब “नीलम” गगन में उड़ रही है !!

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