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हो जीवन मधुमास

दुष्यंत कुमार पटेल

दुष्यंत कुमार पटेल "चित्रांश"

कविता

June 28, 2016

नभ के नवरंग जैसा ज़िंदगी हो सुनहरी
खुशियों की बौछारे हो हर सांझ सवेरा
स्वप्नों सा स्वर्निम ज़िंदगी,हो चाँदनी निशा
तेरी धानी चुनरियाँ खुशियों का है बसेरा

रहे विमल मन, रहे सदा पुलकित ज़िन्दगानी
तू सुरमई शाम दीवानी, तू फूलों की रानी
बहे प्रेम की नदिया, जले प्रेम की ज्योति
बरसे आँगन में मधु की बुंदे झीनी झीनी

उन्हे मिले नई उमंगे ,हो जीवन मधुमास
माँगू रब से दुआ यहीं तू रहे मीत सदा
राह में खिले तेरी जूही,चम्पा, चमेली
तेरे आँगन रहे गुलज़ार न हो कभी खज़ा

आ रही पूर्वइयाँ ,छा रही है बदरिया
रेशम जुल्फें उडे मिल जाये तुझे सावरिया
मन तेरा मधुबन लगे कंचन तेरी काया
बन जा कान्हा की तू दीवानी हरिप्रिया

खिड़की से झाँके ज़िंदगी सात रंगो का इंद्रधनुष
घर-आँगन को आलोकित करे ज्योति हर संध्या
ये कुदरत जन्म दिन पर उसे दे कोई हँसी तोहफ़ा
दुष्यंत की लेखनी तेरी सूरत की क्या करे बयाँ

Author
दुष्यंत कुमार पटेल
नाम- दुष्यंत कुमार पटेल उपनाम- चित्रांश शिक्षा-बी.सी.ए. ,पी.जी.डी.सी.ए. एम.ए हिंदी साहित्य, आई.एम.एस.आई.डी-सी .एच.एन.ए Pursuing - बी.ए. , एम.सी.ए. लेखन - कविता,गीत,ग़ज़ल,हाइकु, मुक्तक आदि My personal blog visit This link hindisahityalok.blogspot.com
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