Skip to content

हो जाओ

Rishav Tomar (Radhe)

Rishav Tomar (Radhe)

गज़ल/गीतिका

June 15, 2017

मोहबत में गुलाब हो जाओ
मंजर ए मेहताब हो जाओ

इस तरह करो मोहबत हमसे
बिल्कुल लाजबाब हो जाओ

बस इतना ही कहूँगा साथी
चाँदनी मय रात हो जाओ

बस एक ही है ख्याहिश मेरी
तूम आँखों का ख्याब हो जाओ

भले जमाना हम पर सवाल उठाये
तुम सभी के लिये जबाब हो जाओ

माथे की लकीरों को बदल कर
तुम मेरी उजली शाम हो जाओ

बिल्कुल बेबाक निडर मेरी तरह
तुम खुली किताब हो जाओ

प्रकृति नियमो को तार तार कर
तुम गर्मी में बरसात हो जाओ

मेरे दिल की बंजर जमी पर साथी
तुम तेज सी बरसात हो जाओ

मेरी आँखों मे पतझड़ लगा है साथी
तुम मेरा महकता हुआ बसंत हो जाओ

मोहबत की चोट से कभी टूटना मत
तुम पाषाण से भी कठोर हो जाओ

लैला मंजनू हीर रांझा सी नही
तुम मुझे मिलो वैसी हो जाओ

राधा बन मुझे भले ही हँसना मत
लेकिन रुक्मिणी सा साथ हो जाओ

लोग मोहबत की मिसाल ताज से देते है
मेरी मुमताज तुम बेमिसाल हो जाओ

तुम मेरी आँखों मे बसती हुई साथी
ऋषभ की धड़कती आवाज हो जाओ

रचनाकर ऋषभ तोमर

Share this:
Author
Rishav Tomar (Radhe)
ऋषभ तोमर अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश से है ।गणित विषय के विद्यार्थी है।कविता गीत गजल आदि विधाओं में साहित्य सृजन करते है।और गणित विषय से स्नातक कर रहे है।हिंदी में प्यार ,मिलन ,दर्द संग्रह लिख चुके है

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you