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” हो गये पल में पराये ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

March 30, 2017

नेह के धागे बन्धे थे ,
द्वार खुशियों से सजे थे !
बचपन की यादें सुहानी ,
अंखियों में वे रतजगे थे !
जाने कैसी घड़ी आयी –
बोल बागी नज़र आये !!

झनझना कर तार टूटे ,
रिश्ते लगे बेकार झूंठे !
टूट कर चाहा था जिनको ,
ले अहं का भाव रूठे !
महके महके ख़्वाब टूटे –
पलकों पे ना संवर पाये !!

जब कभी शीशा दरका ,
उसकी कोई ना सुनता !
दूसरा सजने को आतुर ,
जो टूटा , टूटा औ बिखरता !
वक़्त बांधे ना बंधे है –
बनते बिगड़ते अपने साये !!

Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more
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