गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

हो गई है

जवानी से शिकायत हो गई है
अभी तुम से मुहब्बत हो गई है

लबों को क्यों न भायें आज कोई
मुझे तू छूँ सके लत हो गई है

सुबकने क्यों लगी है आँख तेरी
इसे किसकी इजाजत हो गई है

नजर से जब नजर मेरी मिली जब
गजल कह दूँ यहीं चाहत हो गई

गये है जब हमें वो छोड़ कर के
निगाहों की मुझे लत हो गई है

हमेशा के लिए मत छोड़ के जा
कहूँ सच बादशाहत हो गई है

21 Likes · 65 Views
Like
Author
691 Posts · 69.6k Views
डॉ मधु त्रिवेदी शान्ति निकेतन कालेज आफ बिजनेस मैनेजमेंट एण्ड कम्प्यूटर साइंस आगरा प्राचार्या, पोस्ट ग्रेडुएट कालेज आगरा *************** My blog madhu parashar.blogspot.in Meri Dunia कोर्डिनेटर * राजर्षि टंडन ओपन…
You may also like:
Loading...