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होली

Pritam Rathaur

Pritam Rathaur

गज़ल/गीतिका

April 20, 2017

होली ?की आप सबको हार्दिक
बधाई एवं शुभकामनाएं
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गाल मेरे वो लाल करता है
रंग डाले गुलाल मलता है
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देख के मुँह बिगड़ गया कैसे
आइना भी सवाल करता है
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भांग की मस्तियाँ निराली है
देख भाभी को आह भरता है
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खुसनुमां हर समां होता है
माह फागुन का मस्त लगता है
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खिलखिलाता बसंत का मौसम
नूर ही नूर बस बरसता है
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साथ साजन नही है जिसके
ख़ाब दिल में हजार जलता है
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रात कटती नही अकेले फिर
मचलता दिल बवाल करता है
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आँख दिन-रात राह तकती है
बेकरारी में दिन गुज़रता है
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छोड़ देता है साथ साया भी
दिल तनिक भी नही संभलता है
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हाल पूछो न हिज़्र की “प्रीतम”
रात ढलती न दिन निकलता है

Author
Pritam Rathaur
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है... Read more
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