होली

बाल कविता (होली)

रंग बिरंगी आई होली
बच्चे करते हंसी ठिठोली

पिचकारी ले ले कर भागे
इक दूजे के पीछे आगे

भूल गए हैं कंचा गोली
रंग बिरंगी आई होली

नीले पीले लाल गुलाबी
हरे बैंगनी और शराबी

बना बना कर खेलें टोली
रंग बिरंगी आई होली

चुन्नू ने ने मुन्नू को पकड़ा
गोलू ने चेहरों को रगड़ा

फिर भी आपस में हमजोली
रंग बिरंगी आई होली

मां कहती मत भीगो तुम अब
धमा चौकड़ी शान्त करो अब
बहुत हो चुकी अब तो होली

रंग बिरंगी आई होली
बच्चे करते हंसी ठिठोली

नरेन्द्र मगन, कासगंज
9411999468

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