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होली हैं (दोहे)

ramprasad lilhare

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दोहे

March 13, 2017

” होली है”(दोहे)
1.
खेलों सभी जन मिल के, होली का त्योहार।
भेदभाव सब छोड़ दो, छोड़ो सब तकरार।।

2.
लकड़ी ना जलाकर के, मन का बैर जलाय।
गुल की होली खेलिये, पानी दियो बचाय।।

3.
क्लेश द्वेष सब छोड़िये, मन का भेद मिटाय।
एेसी होली खेलिये, सब का मन हरसाय।।

रामप्रसाद लिल्हारे
“मीना “

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Author
ramprasad lilhare
रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा... Read more

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