"होली" सायली छंद

सायली छंद
(१, २, ३, २ ,१ )
*होली*
उमंग
रंग -बिरंगी
तन-मन छाई
प्यारी होली
आई।

बरसा
टेसू रंग
आँगना भीगी चोली
खूब खेली
होली

थिरका
अंग-अंग
झूमे -नाचे टोली
रंग-रंगीली
होली

गाल
अबीर -गुलाल
भीगी चूनर झीनी
रासरंग डूबी
होली

पकड़
कलाई मरोड़ी
भर पिचकारी रंग
भीगे राधा
अंग

हिलमिल
गोपी-ग्वाले
खेलें श्यामा भोली
कान्हा संग
होली

डॉ. रजनी अग्रवाल”वाग्देवी रत्ना”

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 1
Views 181

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share