होली -रंगों का त्योहार

रंगों को मज़हब का नाम मत दो ,
नफरतों का यू तुम पैग़ाम मत दो ।
हम एक है हमें एक रंग में रंगने दो ,
ये भेदभाव का हमें कोई काम मत दो ।

आज इस रंगों को गालों पर लगा भी दो ,
आपसी मतभेदों को तुम भगा भी दो ।
मत पड़ना कभी सियासत में तुम कभी ।
जो सो रहा है अब उसे जगा भी दो ।

रंगों की इस दुनिया में ख़ुद को रंग भी दो ,
जो नही है अब तक साथ उसके संग भी दो ।
गुलाल इस कदर उड़ाओ की इश्क़ हो जाये
इश्क़ के रंगों में थोड़ा तुम उमंग भी दो ।

तुम उसके गालों को भी आज लाल कर दो ,
हर एक रंग को इस तरह मिलाओ की गुलाल कर दो ।
नही बच सकते आज इस मोहब्बत के रंगों से
इन रंगों के पर्व को ख़ुद में बेमिसाल कर दो ।

-हसीब अनवर

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