मुक्तक · Reading time: 1 minute

होली पर शिकायत

लगाते रंग औ ना अंग ये उनकी शिकायत है!
गले मिलना लगाना रंग होली की रिवायत है!
मेरी मजबूरियां समझो मेरा मन भी मचलता है!
कि रखना दूरियां दोगज की शासन की हिदायत है!

……. ✍ ‘प्रेमी’

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