.
Skip to content

होली (घनाक्षरी)

Kaushlendra Singh Lodhi

Kaushlendra Singh Lodhi

घनाक्षरी

March 13, 2017

हरा पीला काला लाल।
नीला जामुनी गुलाल।।
लेके बड़े बूढ़े बाल।
चली कहाँ टोली रे।।

बजते नगाड़े ढोल।
करें सब मेल जोल।।
प्रेम रंग अनमोल।
बोले मीठी बोली रे।

रंग भरी पिचकारी।
रंगों की बौछार जारी।
खेल रहे नर नारी।
भर भर झोली रे।।

हिन्दू व मुसलमान।
ईसाई सभी समान।
प्रेम सबसे महान।
मिल खेलें होली रे।।

होली के पावन पर्व की हार्दिक शुभ कामनाएं????

कौशलेन्द्र सिंह लोधी ‘कौशल’

Author
Kaushlendra Singh Lodhi
कौशलेन्द्र सिंह लोधी "कौशल" कवि नि. मतरी बर्मेन्द्र, तहसील-उन्चेहरा, जिला-सतना (म.प्र.) I राजस्व निरीक्षक पद पर तहसील-पलेरा, जिला-टीकमगढ़ (म.प्र.) में सेवारत I शिक्षा - बी.एस-सी.(MPG)
Recommended Posts
( होली आयी रे होली )
( होली आयी रे होली ) होठो पर मुस्कान बिखेर तन मन को रंगने आयी प्रेम सौहार्द भाई चारा को जीवन को खुशहाल बनाने होली... Read more
होली खेलो यार मीत ,यह बात मैं दिल से करता हूं। रंग में भर के प्यार आज,दुनिया को रंग मैं रंगता हूं। प्रेम का आधार... Read more
होली की मनहरण (घनाक्षरी 8,8,8,7)
होली की मनहरण गाँव-गाँव गली-गली मिलकर खेलों होली सबके दिलों में अब प्यार होना चाहिए। भेदभाव भूलकर रहो सब मिलकर किसी को भी नहीं अब... Read more
होली आई रे आई
होली आई रे आई ,रंग विरंगे रंग लाई| चहु खुशियाँ है छाईहोली आई रे आई|| ????? खुशियाँ बाँटे खेले रंगपीके सारे झूमे भंग| खाते गुझिया... Read more