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होली के रंग।

Rishikant Rao Shikhare

Rishikant Rao Shikhare

शेर

March 19, 2017

उन गुलाबी चाँद के चेहरे पे थोड़ी रंग लगा देते,
आइ्ये घनी गर्दीसो के बीच बाते कुछ सजा लेते।
बस एक चाह हमारी भी थी उन दिनों तक,
जो तुम पास होते हम भी रंग-ए-जस्न मन लेते।

Author
Rishikant Rao Shikhare
चुराकर दिल मेरा वो बेखबर से बैठे हैं;मिलाते नहीं नज़र हमसे अब शर्मा कर बैठे हैं;देख कर हमको छुपा लेते हैं मुँह आँचल में अपना; अब घबरा रहे हैं कि वो क्या कर बैठे हैं
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