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होली के बहाने

kamlesh goyat

kamlesh goyat

गज़ल/गीतिका

March 8, 2017

नफरत को सुला प्रीत दिलों में जगा लें होली के बहाने,
छोड़ जाए जो प्यार का पैगाम,उस रंग को लगा लें होली के बहाने।
लाल,पीला,नीला,हरा सबका होता अपना रंग,
आ हर रंग को आजमा लें होली के बहाने।
कहीं देवर-भाभी तो कहीं बुजुर्ग जोड़ी करे ठिठौली,
याद जरा करलें वक्त वो मलचला होली के बहाने।
ना बचकानी हरकत हो और ना फूहड़ता,
मस्ती का निराला उत्सव मना लें होली के बहाने।
जिंदगी उलझ गई कमलेश जीवन की उलझन में,
आ हर उलझन को सुलझा लें होली के बहाने।
कमलेश गोयत

Author
kamlesh goyat
मैं कमलेश गोयत। हिंदी उपन्यास लिखती हूँ। कविता लिखने की कोशिश भी करती हूँ। मेरा दूसरा उपन्यास विजेता आजकल साहित्यपीडिया पर प्रकाशित हो रहा है । 250 पृष्ठों का यह उपन्यास आपका भरपूर मनोरंजन करेगा। यह हर पाठक वर्ग के... Read more
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