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होली के दोहे

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

दोहे

March 13, 2017

होली पर दोहे प्रीत रंग भीगी धरा, रजनी दे सौगात। नेह सरस छिटकाय दो, बचे न कोई गात फाल्गुन में नीके लगें, हास, व्यंग्य ,परिहास। दो हज़ार सतरह रचे, होली का इतिहास।। तरुणाई महुआ सजी, टेसू धारे आग। लोकतंत्र में घुल गया, भगुआवादी फाग।। राधा चूनर राचती, कान्हा लाल गुलाल। ढ़ोल-नगाड़े बाजते,फाल्गुन हुआ निहाल।। जोगी सब भोगी हुए, देख फाग हुड़दंग। बरसाने की लाठियाँ,देवर -भाभी संग।। रंग सजा तन-मन खिला,तिलक राजता भाल। सरहद होली खेलता,मातृभूमि का लाल।। राग- द्वेष बिसराय के, ऐसी होली होय। निर्धन घर दीपक जले, बैर-भाव मन खोय।। डॉ. रजनी अग्रवाल”वागेदेवी रत्ना”

Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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