होली आई रे...

गीत
Mar 19, 2019
होली आई होली आई होली आई रे…..
रंग बिरंगे फूलो की, डोली आई रे।

रंग गुलाल उड़ा,हवा की फुहार मे
मन का मैल धुला,प्रीत की धुआँर मे।
सब संग संग मिले,प्रेम के है पुष्प खिले
जो कभी नही मिले थे,प्रीत से वो गले मिले।।

रूठे हुए रिश्तों को मनाने आई रे…
गीत प्रीत और उमंग के सुनाने आई रे।

बसंत की बहार आई.संग टेशू फूल लाई
अमुआ के बौर संग,कोयल का पैगाम. लाई
मुँह से मीठा बोलो ,सदा,मुश्किल मे काम आओ।
आपस मे न बैर रखो,प्रेम से रिश्ते निभाओ।।

मिश्री मिठास से,खटास,मन की भगाने आई रे…
सबके दिलो मे,हर्ष उल्लास जगाने आई रे।

हरा रंग उड़ने लगा है, इस धरा की गोद मे
लाल रंग दौड़ पड़ा है,अंबर की होड़ मे।
पीला रंग ढकने लगा है,उस रवि के तेज को
गुलाबी रंग ने ढक लिया ,सबके मुख के ओज को।।

तपन केआगाज़ से, सख्त मन को पिघलाने आई रे…
इंद्रधनुषी रंगों से, मन को,सबके हरषाने आई रे।

रेखा कापसे(Line_lotus)
होशंगाबाद, मध्यप्रदेश

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