गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

होते हैं कुछ उसूल भी व्यापार के लिये

होते हैं कुछ उसूल भी व्यापार के लिये
अख़लाक़ शानदार हो किरदार के लिये

इक़रार मुद्दतों में हुआ फ़ासला रहा
तड़पे बहुत हैं प्यार के इज़हार के लिये

जा तो रहा है साथ में लेकिन नहीं है ख़ुश
राज़ी हुआ है बाद में उसपार के लिये

दुनिया की शै हरेक ही तो बाकमाल है
लेकिन नहीं बनी है वो बाज़ार के लिये

आसां नहीं है राह कोई भी सफ़र में तो
मुश्किल नहीं है राह समझदार के लिये

सुनता यहाँ पे कौन है मजबूर की सदा
मुश्किल यहाँ तमाम हैं लाचार के लिये

मुश्किल बहुत है वक़्त से पहले हुआ न कुछ
चलना पड़ा है तेज़ तो रफ़्तार के लिये

निर्दोष या ग़रीब हो धनवान आदमी
गर्दन सभी हैं एक सी तलवार के लिये

आलात ज़िन्दगी के वफ़ा प्यार सब्र हैं
‘आनन्द’ नेकियाँ हैं वफ़ादार के लिये

शब्दार्थ:- आलात = औज़ार

– डॉ आनन्द किशोर

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