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" होठों पर पलने लगे हैं , मीठे मीठे छंद " !!

अनुभूति छुअन की ,
दर्द मीठा सा जगाये !
झोंका नम हवा का ,
आँखों में सपने सजाये !
खिड़कियों के पट –
अब कहाँ हैं बंद !!

धीमी पदचाप ले ,
धूप है कभी छाँव !
अब यहां डिगने लगे ,
स्मृतियों के पाँव !
आँगने बौरा गयी है –
फिर यहाँ मधुगंध !!

हमने सजाये थे ,
किताबों में गुलाब !
ताज़ा दम रखे अभी ,
महक जाते ख़्वाब !
कसमसाती ज़िन्दगी है –
और कई अनुबंध !!

साँसों पर सजाई ,
प्यार की सरगम !
भुजदंड ढीले पड़ गये ,
ऐसे कसे बंधन !
प्रीत में रमने लगा मन –
हो गया निर्द्वन्द !!

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भगवती प्रसाद व्यास
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता...
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